निकम्मेपन का उदारता पर प्रभाव
भारत एक अति-अति परमप्राचीन देश है, जिसने दुनिया को सब कुछ सिखाया… भारत ने उदार होकर अपनी विशेशताये बान्टी… जब विदेशी राजाओ को भूमि न मिली तो उन्होने यहा पर आकर राज किया…जब अन्ग्रेज़, फ़्रान्सीसी, डच, पुर्त्गाली व्यापारियो को बाज़ार ना मिला तो उन्होने इस पावन धरती का रुख किया…भारत ने खूब बान्टा…जब अमरीका को सैनिक अभ्यास की ज़रूरत हुई तो भारत ने कहा कि आओ, हमारी बन्गाल की खाडी इफ़रात पडी है, यूज करो…
जब विश्व व्यापार सन्गठन ने कहा कि भारत अन्तर्राश्ट्रीय व्यापार मे शामिल हो तो विकास का सपना देखता भारत उसमे भी शामिल हो गया…. और सच मे, भारत विकसित होने लगा.. आप ही देखियी कि जो वित्त मन्त्री था, वह प्रधान मन्त्री बन गया…और दूसरे वित्त मन्त्री को भी प्रेरित कर रह है कि मेरे बाद तुम्हारा ही नम्बर है… हालान्कि हमारे देश के ज्यादातर नेता तो निकम्मे है ….यानि, इस देश का पूजीपति निकम्मा, इस देश के सैनिक निकम्मे, इस देश की खाडी और समुद्र निकम्मे, इस देश के छोटे दुकान्दर निकम्मे, मछुआरे निकम्मे, किसान निकम्मे…
हमारी पार्लियामेन्ट मे भी बहुत से प्रतिनिधि निकम्मे है, इस लिए हमे उसमे भी कुछ सीटे इन्ग्लैड अमरीका कोरिया आदि देशो के लोगो के लिए आरक्शित कर देना चाहिए.. और महपुरुशो की मूर्तिया भी हटा कर कुछ विदेशी नेताओ की मूर्तिया स्थापित करनी चहिये… तब शायद देश के बच्चो को नई प्रेरणा से भरा जा सकेगा … अभी से हमारे देश के नन्हे मुन्ने नागरिक भी उदारतावाद या उदारीकरण के प्रभाव मे आने लगे है… वे लस्सी, शिकन्जी, त्तजे फ़लो क रस नही पीते है, बिना नाक भौ चढाए पिज़्ज़ा-बुर्गर के नाम पर बासी खाना भी खा लेते है… उनका मन हमारे कब्ज़े मे आ चुका है….
लिहाज़ा अब हम सच मे उदार हो चुके है, इस लिये सन्सद मे कुछ सीटे यूरोप-अमरीका वालो को दे देने पर नागरिको से बडा विरोध या कोई ज्यादा खतरा नही पैदा होनी वाला है… जय हिन्द !