Archive for September, 2007

एक नौकरशाह की पीडा-फ़ोन पर पत्नी से बात

September 19, 2007

जानता हू- उदास होन्गे बच्चे

तुमने भी कोई कसर न छोडी होगी

उनकी मान्ग पूरी करने मे,

उन्हे मनाने

कपडे-खिलौने लाने का भी ख्याल रखा होगा तुमने .

कब आऊन्गा ?

शायद सरकार बदले इस बार

तो नई करवट लेगा प्रशासन भी

शायद तब आ सकू…

मध्यावधि चुनाव के बाद महन्गाई ?

उसकी क्या चिन्ता !

साथ-साथ सह लेन्गे…

उम्मीद ? वह तो छलिया है, टूटती नही कभी

टूट जाये तो हो जाये, इस पार या उस पार

रोज़ाना किश्तो मे टूटते-टूटते

मेरे पूरी तरहटूट जाने से पहले..

हा भई, वह भी देखा है कई बार

आफ़िस के कम्प्यूटर मे ही लोड कर लिया है

सोफ़्टवेयेर कुन्डली वाला

देखता हू अक्सर

लिखा है- साल अच्छा गुज़रेगा

इसलिए भी है उम्मीद…

ऐसा क्यो होता है?

यू समझो कि एक गाव बन गई है धरती

वैश्वीकरण के इस दौर मे

अनुचित है, अनैतिक है

परिवार से दूर रहकर उदास होना

बस काम करना, खटना..

तुम  ना समझो, ना सही

मै भी कहा समझ पाता हू

पर समझाओ बच्चो को

धीरे-धीरे-धीरे…….. !

Hello world!

September 17, 2007

हैरानी होती है कि किस तरह से बाज़ारवाद और बाज़ारू होने का भूत भारत के राजनेताओ के सिर मे इतनी गहरायी तक  तक घुस गया है कि विदेशी कम्पनीयो को न केवल अनुमति दे रहे है बल्कि अपना सरकारी चैनल दूरदर्शन को भी उनके हवाले कर चुके है… पारादीप, उडीसा मे जनता कोरिया की कम्पनी पोस्को क विरोध कर रही है और दूरदर्शन का नैशनल चैनल रविवार को कोरिया मे निर्मित धारावाहिक दिखा रहा है… सिर्फ़ यही नही, जब पता चला कि ओडीसा मे ओडिया बोली जाती है तो धारावाहिक का ओडिया सन्सकरण भी दूरदर्शन के नैशनल-ओडिया चैनल पर दिखाना शुरु कर दिया… इस तरह उडीसा मे एक ही दिन रविवार को दो घन्टे के अन्तराल मे कोरिया का धारावाहिक घर का चिराग हिन्दी और उडिया मे दो बार दिखाया जा रहा है और दोनो की ही प्रायोजक है पोस्को कम्पनी. .. एक और खास बात, इसके टेक्नीकल डाइरेक्टर है रिवर्बैन्क स्टूदिओ से जुडे माइक पान्डेय तथा माइक पाण्डेय एक और कार्यक्रम दूर्दर्शन पर हे प्रस्तुत करते है–अर्थ मैटर्स, जो पर्यावरण से जुडा है. इसमे भी पान्डेय जी यह बताना नही भूलते कि पोस्को कम्पनी के पास तकनीक है कि प्रदूशन बेहद कम होता है…(लिहाजा पोस्को का विरोध नही होना चाहिए..).

सच, आज ना केवल कम्पनिया ही नोच-खसोट मे लगी है, बल्कि सरकार भी दलाली करने लगी है… उसने अपनी सभी एजेन्सिओ को पूरी छूट दे दी है कि वह यथासम्भव बलात्कर्मो मे लगी रहे… इसमे जो विरोधी होगा वह विकास का, देश क दुश्मन होगा, नक्सलवादी होगा, असामाजिक होगा…

देश के प्रति प्रेम के अर्थ कौन बतायेगा…!