हैरानी होती है कि किस तरह से बाज़ारवाद और बाज़ारू होने का भूत भारत के राजनेताओ के सिर मे इतनी गहरायी तक तक घुस गया है कि विदेशी कम्पनीयो को न केवल अनुमति दे रहे है बल्कि अपना सरकारी चैनल दूरदर्शन को भी उनके हवाले कर चुके है… पारादीप, उडीसा मे जनता कोरिया की कम्पनी पोस्को क विरोध कर रही है और दूरदर्शन का नैशनल चैनल रविवार को कोरिया मे निर्मित धारावाहिक दिखा रहा है… सिर्फ़ यही नही, जब पता चला कि ओडीसा मे ओडिया बोली जाती है तो धारावाहिक का ओडिया सन्सकरण भी दूरदर्शन के नैशनल-ओडिया चैनल पर दिखाना शुरु कर दिया… इस तरह उडीसा मे एक ही दिन रविवार को दो घन्टे के अन्तराल मे कोरिया का धारावाहिक घर का चिराग हिन्दी और उडिया मे दो बार दिखाया जा रहा है और दोनो की ही प्रायोजक है पोस्को कम्पनी. .. एक और खास बात, इसके टेक्नीकल डाइरेक्टर है रिवर्बैन्क स्टूदिओ से जुडे माइक पान्डेय तथा माइक पाण्डेय एक और कार्यक्रम दूर्दर्शन पर हे प्रस्तुत करते है–अर्थ मैटर्स, जो पर्यावरण से जुडा है. इसमे भी पान्डेय जी यह बताना नही भूलते कि पोस्को कम्पनी के पास तकनीक है कि प्रदूशन बेहद कम होता है…(लिहाजा पोस्को का विरोध नही होना चाहिए..).
सच, आज ना केवल कम्पनिया ही नोच-खसोट मे लगी है, बल्कि सरकार भी दलाली करने लगी है… उसने अपनी सभी एजेन्सिओ को पूरी छूट दे दी है कि वह यथासम्भव बलात्कर्मो मे लगी रहे… इसमे जो विरोधी होगा वह विकास का, देश क दुश्मन होगा, नक्सलवादी होगा, असामाजिक होगा…
देश के प्रति प्रेम के अर्थ कौन बतायेगा…!
September 17, 2007 at 11:54 am
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