छोटी छोटी कविताये

By aatmadarshee

चान्द है सुन्दर मगर कब पास है

गीत है लेकिन गले का दास है

है सुरा मधुमय मगर उपवास है

अस्तित्व तेरा भी यू ही अहसास है..

प्रेम क्या है, ज़िन्दगी का एक सम्मोहक सपन है

है सफल तो वासना है, असफल है तो रुदन है…

जी चाहता है दोस्त हम तुमसे न कुछ कहे

मगर वह सज़ा क्या जिसके लिए तैयार तुम रहो !

जानते है तुम समन्दर बन के न हमसे मिलोगे

तपते रेगिस्तान मे लेकिन सफ़र सुहाना है…

धूप रेगिस्तान-सी पा फूल उपवन मे जले

मूर्ख है वे जो सुकोमल भावनाओ मे पले

हो हृदय पाषाण के, तन भी लोहे के बने

ताकि तपकर ताप मे भी विविध सान्चो मे ढले…

3 Responses to “छोटी छोटी कविताये”

  1. समीर लाल Says:

    बढ़िया. लिखते रहें. शुभकामनायें.

  2. divyabh Says:

    बाकी सभी पंक्तियाँ बहुत ही लाजबाव है
    पर प्रेम की सफलता वासना नहीं दिव्यता है…
    उसकी असफलता जरुर वासनात्मक यानि
    कामना स्वरुप होती है…।

  3. afloo Says:

    वाह ! वाह ! सतत पोस्ट करना जारी रखें।

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