कविता किसे कहते है

वह जो कवि लिखते है और कवियो  जैसा दिल रखने वाले पढते है… बाकी दुनिया को कविता से क्या मतलब… उनके लिए तो कविताये हिन्दी फ़िल्मी गीतो से कमतर होती है… क्या रद्दी गीत लिखने वालो से फ़िल्मी दुनिया को मुक्त नही किया जा सकता… क्या साहिर, मजरूह, हसरत, शैलेन्द्र, राजा अली खान, गुल्ज़ार, नीरज, नरेन्द्र शर्मा जैसे लोग ज़ाहिल गीतकारो को हताने की हिम्मत नही कर सकते….! सच बहुत तकलीफ़ होती है… खैर अपना क्या, अपन तो मस्त है पुराने गाने सुनने मे… नई पीढी को अच्छे सन्स्कार देने वाले गीतो के ज़रूरत है…!

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