Archive for the ‘कविता’ Category

छोटी छोटी कविताये

October 1, 2007

चान्द है सुन्दर मगर कब पास है

गीत है लेकिन गले का दास है

है सुरा मधुमय मगर उपवास है

अस्तित्व तेरा भी यू ही अहसास है..

प्रेम क्या है, ज़िन्दगी का एक सम्मोहक सपन है

है सफल तो वासना है, असफल है तो रुदन है…

जी चाहता है दोस्त हम तुमसे न कुछ कहे

मगर वह सज़ा क्या जिसके लिए तैयार तुम रहो !

जानते है तुम समन्दर बन के न हमसे मिलोगे

तपते रेगिस्तान मे लेकिन सफ़र सुहाना है…

धूप रेगिस्तान-सी पा फूल उपवन मे जले

मूर्ख है वे जो सुकोमल भावनाओ मे पले

हो हृदय पाषाण के, तन भी लोहे के बने

ताकि तपकर ताप मे भी विविध सान्चो मे ढले…

एक नौकरशाह की पीडा-फ़ोन पर पत्नी से बात

September 19, 2007

जानता हू- उदास होन्गे बच्चे

तुमने भी कोई कसर न छोडी होगी

उनकी मान्ग पूरी करने मे,

उन्हे मनाने

कपडे-खिलौने लाने का भी ख्याल रखा होगा तुमने .

कब आऊन्गा ?

शायद सरकार बदले इस बार

तो नई करवट लेगा प्रशासन भी

शायद तब आ सकू…

मध्यावधि चुनाव के बाद महन्गाई ?

उसकी क्या चिन्ता !

साथ-साथ सह लेन्गे…

उम्मीद ? वह तो छलिया है, टूटती नही कभी

टूट जाये तो हो जाये, इस पार या उस पार

रोज़ाना किश्तो मे टूटते-टूटते

मेरे पूरी तरहटूट जाने से पहले..

हा भई, वह भी देखा है कई बार

आफ़िस के कम्प्यूटर मे ही लोड कर लिया है

सोफ़्टवेयेर कुन्डली वाला

देखता हू अक्सर

लिखा है- साल अच्छा गुज़रेगा

इसलिए भी है उम्मीद…

ऐसा क्यो होता है?

यू समझो कि एक गाव बन गई है धरती

वैश्वीकरण के इस दौर मे

अनुचित है, अनैतिक है

परिवार से दूर रहकर उदास होना

बस काम करना, खटना..

तुम  ना समझो, ना सही

मै भी कहा समझ पाता हू

पर समझाओ बच्चो को

धीरे-धीरे-धीरे…….. !